Posts

Showing posts from May, 2020

52_Cruelities_On_GodKabir

Image
शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी, खूनी हाथी के आगे‌ डालै, बांध जूड अविनाशी, हाथी डर से भाग जासी, दुनिया गुण गाती है। शेखतकी ने अविनाशी को मारने के लिए खूनी हाथी के आगे डाला। हाथी कबीर भगवान के पास जाते ही डर कर भाग गया। तब लोगों ने कबीर साहेब की जय-जय कार की। कबीर भगवान अविनाशी है। दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेखतकी ने कहा कि अगर यह कबीर अल्लाह है तो इसकी परीक्षा ली जाए कोई मुर्दा जीवित करे। तब सर्वशक्तिमान कबीर परमात्मा ने दरिया में बहते आ रहे एक लडके के‌ शव को हजारों लोगों के सामने जीवित किया। उसका नाम कमाल रखा। कबीर परमेश्वर समर्थ भगवान हैं। पूर्ण परमात्मा ही मृत व्यक्ति को जीवित कर सकता हैं।

खराब शिक्षा और संस्कार

Image
सारी गलती माता और पिता की है 95% माताजी की है आज_की_वेश्या  कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक वैश्या का नाच देखने के लिए लोग उसके खास मकान(कोठे) पर जाया करते थे। तो वो वैश्या  देखने वालों को अपनी मनमोहक नृत्य शैली और अपने नग्नता के जरिए वाह वाही लूटती थी। अगर उस वैश्या से पूछा जाता कि वो ये काम क्यो करती है?  तो 100% में से 99.99% ये जवाब होता के मजबूरी है, में मजबूर हूं शोक में ये काम नहीं करती हूं। वो मजबूरी अगर पता लगाने की कोशिश की जाती तो हर किसी की एक अपनी दिल को दहलाने वाली कहानी होती । किसी के सर पर मां बाप का साया ना रहा, तो किसी को पति हारामी व नालायक  मिला।  ये तमाम बातें करने का मकसद ये है कि उन तवायफों की मजबूरियां समझ में आती थीं। मगर आज की वैश्या को क्या हो गया है? पता नहीं  में बात कर रहा हूं  उन कुछ  *_टिक टोक_* वाली *लड़कियों _* की। जी हां मुझ को पता है कि बहुत से लोगों को मेरी बात बहुत ही बुरी लगी रही होगी मगर ये बात करनी भी ज़रूर है तो में कहना चाहूंगा उन लोगो से (जिनको मेरी बाते बुरी लग रही हैं) के भाई जरा  अपने दिमाग पे ...

मानव जीवन की आम धारणा

Image
जब तक यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान नहीं होता तो जन-साधारण की धारणा होती है कि :- बड़ा होकर पढ़-लिखकर अपने निर्वाह की खोज करके विवाह कराकर परिवार पोषण करेंगे। बच्चों को उच्च शिक्षा तक पढ़ाऐंगे। फिर उनको रोजगार मिल जाए। उनका विवाह करेंगे। परमात्मा संतान को संतान दे। फिर हमारा कर्तव्य पूरा हुआ। कई बार गाँव या गवांड (पड़ौसी गाँव) के वृद्ध इकट्ठे होते तो आपस में कुशल-मंगल जानते तो एक ने कहा कि परमात्मा की कृपा से दो लड़के तथा दो लड़की हैं। कठिन परिश्रम करके पाला-पोसा तथा पढ़ाया, विवाह कर दिया। सब के सब बेटा-बेटियों वाले हैं। मेरा कार्य पूर्ण हुआ। 75 वर्ष का हो गया हूँ। अब बेशक मौत हो जाए, मेरा जीवन सफल हुआ। वंश बेल चल पड़ी, संसार में नाम रहेगा। विवेचन :- उपरोक्त प्रसंग में जो भी प्राप्त हुआ, वह पूर्व निर्धारित संस्कारही प्राप्त हुआ, नया कुछ नहीं मिला। यह परमेश्वर का विधान है। मानव शरीर प्राप्त प्राणी को वर्तमान जन्म में पूर्ण संत से दीक्षा लेकर भक्ति करनी चाहिए तथा पुण्य-दान, धर्म तथा शुभ कर्म अवश्य करने चाहिऐं, अन्यथा पूर्व जन्म के पुण्य मानव जीवन में खा-खर्च कर खाली ह...

दहेज एक कुप्रथा

Image
दहेज भीख मांंगने का सामाजिक तरीका है। फर्क इतना है बस देने वाले की गर्दन झुकी है लेने वाले की अकड़ बड़ी है बेटी को दामाद देखो लालच भरा दानव नहीं दहेज की समस्या सभी धर्मों में है पूरा समाज शादी के नाम पर होने वाली सौदेबाजी का तमाशा देखने आते हैं और खा पीकर जशन मना कर चले जाते हैं

फैशन के शौकीन

Image
फैशन के लिए न जाने कितने जानवरों को मार दिया जाता है जानवरों पर अत्याचार बंद होना चाहिए।  लेदर से बनी चीजों का भूलकर भी प्रयोग न करें। इसके लिए जानवरों के साथ बेहद क्रूरता की जाती है। ये एक महापाप है सब पर रोक लगानी होगी।

"सर्व शक्तिमान परमेश्वर कबीर"

Image
परमेश्वर कबीर जी अपने विधान अनुसार {कि परमात्मा ऊपर के लोक में निवास करता है। वहाँ से गति करके आता है, अच्छी आत्माओं को मिलता है। उनको अपनी वाक (वाणी) द्वारा भक्ति करने की प्रेरणा करता है ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। जहाँ जाने के बाद मनुष्य का फिर से जन्म मरण नहीं होता है।

नशे की लत

Image
नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश हृदय है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, गुर्दे, हृदय। शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। इन सब से निजात पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के सत्संग अवश्य सुनें। शराब में ऐसा नशा है जो अनमोल मानव जीवन को बर्बाद कर देती है। सद्भगति में ऐसा नशा है जो मर्यादा में रहकर की जाए तो जीवन को आबाद कर देती है। फैसला आपको करना है।
Image
शराबी व्यक्ति का शरीर रोगों की खान बन जाता है। जिस कारण उनके परिवार को उनके नशे और बीमारियों पर खर्च के कारण दोहरी मार पड़ती है। शराबी व्यक्ति विचार करें आज किसी की भी संतान उस समय बहुत गर्व महसूस करती है जब उसे अपने स्वावलंबी पिता का परिचय देना हो। शराबी परिजन का परिचय देने में बच्चे हीन भावना का शिकार होते हैं।

नशे की लत

शराब के पीने से कैंसर जैसी भयानक बीमारियाँ होती हैं। इससे मनुष्य हरदम दुःखी होता है। नए नए रोग होते हैं नशे की वजह से।